बदक और आज्ञाकारी बच्चे | Hindi short story for kids

Hindi short story for kids – एक बार की बात है जब जंगल मे एक बदक और उसके बच्चे रहते थे, एक दिन बदक के बच्चे अपनी माँ से ज़िद करते है और कहते है “माँ, चलो ना तालाब मे नहाने चलते है, बहुत दिन हो गए हमें वहां गए ।”

बदक अपने बच्चो से कहती है “ठीक है बच्चो कल सुबह हम तालाब मे नहाने ज़रूर जाएँगे ।”

माँ की बात सुनकर बच्चे खुश हो जाते है । अगले दिन सुबह-सुबह बदक और उसके बच्चे तालाब के लिए निकल जाते है और जैसे ही तालाब के पास पहुंचते है सारे बच्चे ख़ुशी से चिल्लाते हुए तालाब मे छलांग लगाते है ।

बच्चो की आवाज़ सुनकर एक लोमड़ी वहां आ जाती है और झाड़ियों के पीछे छुपकर सारे बदको को तालाब मे नहाते हुए देखती है और मन ही मन कहती है “अरे वाह, इतने सारे बदक के बच्चे, आज तो खाने मे मज़ा ही आ जाएगा, बस इन बच्चो की माँ यहाँ से चली जाए फिर तो मै इन्हे आसनी से पकड़ लूंगी ।”

लोमड़ी बदक से डर रही थी क्योकि बदक आकर मे बहुत बड़ी थी और उसकी बहुत तीखी चोंच थी। इसीलिए वह बच्चो को पकड़ने के लिए माँ के वहां से जाने का इंतज़ार करती है ।

कुछ देर बाद सारे बच्चे माँ से कहते है “माँ, हमें भूख लग रही है, कुछ खाना देदो ।”

बदक बच्चो से कहती है “ठीक है बच्चो, मै तुम्हारे लिए कुछ खाने का लेकर आती हूँ, लेकिन पहले मेरी बात ध्यान से सुनो, कोई भी यहाँ आए और तुम्हे बुलाए तो उसके पास नहीं जाना, चाहे वह अनजान हो या फिर तुम्हारे पहचान का हो ।”

सारे बच्चे माँ की बात पर हां का जवाब देते है और माँ खाना लेने चली जाती है ।

लोमड़ी को वह मौका मिल जाता है जिसका वह इंतज़ार कर रही थी और वह तुरंत झाड़ियों से निकलकर तालाब के किनारे जाती है और बच्चो को आवाज़ लगाती है “सुनो बच्चो, मै तुम्हारी माँ की सहेली हूँ, इधर मेरे पास आओ, मै तुम्हारे लिए खाने का सामान लाइ हूँ ।”

सारे बच्चे लोमड़ी को देखते है और अपनी माँ की बात मानते हुए लोमड़ी के पास जाने से मना कर देते है ।

लोमड़ी तीन-चार बार और कोशिश करती है लेकिन कोई बच्चा उसके पास नहीं आता । लोमड़ी को गुस्स्सा आता है और वह देखती है कि पास मे ही लकड़ी का एक बड़ा सा टुकड़ा तैर रहा होता है, लोमड़ी उसमे कूद कर चढ़ जाती है ताकि वह उस लकड़ी के सहारे तैर कर उन बच्चो के पास पहुंच जाएगी और उनको पकड़ लेगी ।

लोमड़ी लकड़ी पर चढ़कर थोड़े आगे ही बढ़ती है वैसे ही ज़ोर कि हवा चलती है और लोमड़ी की दिशा बदल जाती है और लोमड़ी बच्चो के पास पहुंचने के बजाय  दूसरी तरफ पहुंच जाती है ।

फिर जब बदक की माँ वहां आती है और देखती है कि तालाब के एक कोने मे लोमड़ी है तो वह डर जाती है और अपने बच्चो को वहां से लेकर वापस घर आ जाती है ।

इस तरह बच्चे अपनी माँ की बात को मानकर लोमड़ी से अपनी जान बचा लेते है ।

इस Hindi short story for kids – बदक और आज्ञाकारी बच्चे की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा आपने माता-पिता और बड़ो कि बात मानती चाहिए क्योकि वे हमेशा हमारे लिए अच्छा सोचते है ।

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