सांप और कौंवे की कहानी | Hindi story for kids

इस Hindi story for kids – सांप और कौंवे की कहानी में आप पढ़ेंगे कैसे सांप कौवे के साथ बुरा करता है और उसकी बुराई का ज्यादा नुकसान उसे ही होता है, चलिए कहानी शुरू करते है :-

Hindi story for kids – एक बार की बात है जब जंगल में एक पेड़ पर एक माता कौवा अपने घोंसले में बैठी हुई थी । घोंसले में चार अंडे थे और माता कौवा बहुत ही खुश थी क्योकि अंडे से बच्चो के निकलने का समय आ चुका था ।

उसी पेड़ के निचे एक सांप रहता था और वह कौवे के अंडो को ध्यान से देख रहा था और सोच रहा था की काश उसे एक मौका मिल जाए और वह उन अंडो को खा सके ।

थोड़ी देर बाद माता कौवा खाना ढूढने कुछ देर के लिए अंडो को छोड़कर चली जाती है ।

सांप देखता है की माता कौवा घोंसले में नहीं है तो वह तुरंत पेड़ के ऊपर चढ़ता है और घोंसले में रखे चारो अंडे एक-एक करके निगल जाता है ।

कुछ देर बात माता कौवा जब वापस आती है तो देखती है कि उसके चारो अंडे घोंसले में नहीं थे जिसे देखकर वह बहुत दुखी हो जाती है और निचे आकर सांप से पूछती है “सांप भाई, क्या आपने मेरे अंडे चोरी करते हुए किसी को देखा है क्या  ?”

सांप जवाब देता है “नहीं, मैंने तो नहीं देखा है ।”

समय बीतता है और माता कौवा फिर से अंडे देती है ।

सांप की नज़र उन अंडो पर पड़ती है और उसके मन में फिर से लालच आ जाता है ।

सांप पिछली बार की तरह ही इंतज़ार करता है कि कब माता कौवा अपने घोंसले से जाएगी और उसे वह अंडे खाने मिलेंगे ।

इस बार माता कौआ सांप को बोलकर जाती है कि मेरे अंडो का ध्यान देना मै खाना लेकर आती हूँ ।

सांप जवाब देता है “तुम बिलकुल चिंता मत करो, मै तुम्हारे अंडो का पूरा ध्यान रखूँगा ।”

माता कौवा घोंसले से चली जाती है और जैसे ही वह वहां से जाती है सांप तुरंत पेड़ पर चढ़कर सारे अंडे खा लेता है ।

माता कौआ वापस आती है तो वह सांप को पेड़ से उतरते हुए देख लेती है और जैसे ही वह अपने घोंसले में पहुँचती है तो देखती है की उसके अंडे वहां नहीं है ।

माता कौवा सांप से कहती है “सांप भाई तुमने मेरे अंडे क्यों खाए, मैंने तो तुमपे भरोसा किया था और तुम्हे अंडो का ध्यान देने को कहा था और तुमने ही मेरे अंडे खा लिए ।

सांप घमंड से कौवे को जवाब देता है “हां मैंने तुम्हारे सारे अंडे खा लिए है और तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती हो ।”

सांप की बात सुनकर कौवे को बहुत बुरा लगता है और वह सोचती है सांप को किसी तरह से सबक सिखाना ही पड़ेगा ।

कुछ दिनों बाद माता कौवा कुछ अंडे जैसे दिखने वाले पत्थरो को अपने घोंसले में रख देती है और घोंसले से थोड़ी दूर जा कर छुप कर सांप को देखती है ।

सांप फिर से उन अंडो को देखता है और उन्हें खाने के लिए पेड़ के ऊपर चढ़ जाता है ।

सांप लालच में ध्यान भी नहीं देता की वह अंडा नहीं पत्थर है और वह चारो अंडे जैसे दिखने वाले पत्थरो को जल्दी-जल्दी निगल लेता है ।

जैसे ही वह आखरी पत्थर निगलता है तभी उसे ऐसा लगता है कि उसने जो अंडा खाया है उसमे कुछ गड़बड़ है ।

तुरंत सांप के पेट में दर्द होना चालू हो जाता है और वह पेड़ से निचे गिर जाता है ।

सांप के पेट में असहनीय दर्द होता है और वह ज़मीं पर छटपटाता रहता है ।

तभी वहां पर माता कौवा आती है और सांप से कहती है “तुमने मेरे साथ इतना बुरा किया और देखो आखिर तुम्हारे साथ भी बुरा हुआ ।”

इस Hindi story for kids – सांप और कौवे की कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि हमें कभी भी किसी के साथ बुरा नहीं करना चाहिए क्योकि बुरा करने वालो के साथ बुरा ही होता है इसीलिए कहा जाता है “बुरे काम का बुरा नतीजा “

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