नकलची दोस्त – Kahani hindi for kids

kahani hindi for kids – एक बार कि बात है जब एक शहर में एक बिट्टू नाम का लड़का अपने माता-पिता के साथ रहता था । बिट्टू पढाई और खेलकूद दोनों में बहुत ही अच्छा था और इससे उसके माता-पिता और उसके शिक्षक सभी बहुत खुश रहते थे ।

बिट्टू की कक्षा में ही एक चिंटू नाम का लड़का पढता था, चिंटू और बिट्टू बहुत ही अच्छे दोस्त थे । लेकिन बिट्टू जितना सीधा और पढाई में होशियार था चिंटू उतना ही बदमाश और पढाई में एकदम कमज़ोर था । चिंटू के दिमाग में हमेशा खेल-कूद की बाते ही चलती रहती थी ।

एक दिन विद्यालय में शिक्षक ने सभी बच्चो से कहा “बच्चो, कल तुम्हारी अंग्रेजी विषय की परीक्षा है, तो कल सभी अच्छे से परीक्षा की तैयारी कर के आना और याद रखना जिसके भी काम अंक आएँगे मै उसे कड़ा दंड दूंगा। “

शिक्षक की बात सुनकर बिट्टू दर जाता है और मन ही मन सोचता है “ये शिक्षक तो बड़ी ज़ोर से छड़ी से मरते है, कल मै अच्छे से परीक्षा की तैयारी कर के आऊंगा ।”

विद्यालय की छूती होने के बाद बिट्टू सीधा अपने घर जाता है और खाना खा कर तुरंत पढ़ने बैठ जाता है ।कुछ देर बाद चिंटू बिट्टू के पास आता है  जिसे देखकर बिट्टू कहता है “अरे चिंटू, तुम यहाँ कैसे आए ?”

चिंटू कहता है “मै तुम्हे उद्यान ले जाने आया हूँ, चलो, उद्यान में खेलने चलते है ।”

बिट्टू कहता है “नहीं चिंटू, मै आज उद्यान नहीं जाऊंगा, मुझे कल की परीक्षा की तैयारी करनी है और तुम भी जाकर पढाई करो ।”

फिर चिंटू कहता है “बिट्टू, तुम तो जानते ही हो, मै कितनी भी कोशिश कर लु, मुझे अंग्रेजी समझ में ही नहीं आती है ।”

इस पर बिट्टू कहता है “थिंक है चिंटू, तुम जाकर उद्यान में खेलो और कल तुम परीक्षा में मेरी नक़ल कर लेना, इससे, मेरे साथ तुम्हारे भी अच्छे अंक आ जाएंगे ।”

अगले दिन परीक्षा में दोनों ने ऐसा ही किया, बिट्टू ने जल्दी-जल्दी प्रश्न पत्र के सारे प्रश्नो के उत्तर अपनी पुस्तिका में लिख लिया और फिर छुपके से अपने बगल में बैठे चिंटू को अपनी उत्तर पुस्तिका दिखा दी जिससे चिंटू ने भी अपनी उत्तर पुस्तिका में सारे प्रश्नो के उत्तर लिख लिए ।

परीक्षा के तुरंत बाद ही शिक्षक सभी छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की जाँच करना शुरू कर देते है और जब वे देखते है कि चिंटू ने सारे प्रश्नो का सही-सही उत्तर लिखा है तो वे मन ही मन सोचते लगते है “चिंटू तो इतना बदमाश और पढाई में कमज़ोर है, वह कैसे सारे प्रश्नो के उत्तर लिख सकता है क्योकि आज से पहले तो उसने ऐसा कभी नहीं किया था।”

फिर शिक्षक सभी छात्रों से कहते है “बच्चो, कल तुम्हारी गणित विषय की परीक्षा है, सभी अच्छे से तैयारी करके आना ।”

विद्यालय से छुट्टी के बाद बिट्टू और चिंटू दोनों साथ में घर जा रहे थे तभी बिट्टू चिंटू का चेरा देखकर पूछता है “अरे चिंटू, क्या बात है, तुम इतने उदास क्यों लग रहे हो ?”

चिंटू कहता है” बिट्टू, मुझे गणित तो बिलकुल भी समझ में नहीं आता है ।”

फिर बिट्टू कहता है “अरे चिंटू, तुम इतनी क्यों चिंता कर रहे हो, जैसे आज तुमने मेरी नक़ल की है वैसे ही कल भी मेरी नक़ल कर लेना ।”

अगले दिन रोज़ की तरह दोनों एक साथ परीक्षा देने के लिए बैठे थे लेकिन तभी शिक्षक ने बिट्टू से कहा “बिट्टू, तुम वहा पायल के साथ बैठ जाओ ।”

बिट्टू परेशान हो कर शिक्षक से कहता है “लेकिन मै तो हमेशा चिंटू के साथ ही बैठता हूँ ।”

शिक्षक कहती है “लेकिन आज तुम पायल के साथ बैठकर परीक्षा दोगे ।”

शिक्षक के आदेश पर बिट्टू पायल के साथ बैठ जाता है और इधर चिंटू को अकेले बैठकर ही परीक्षा देनी पड़ी ।

परीक्षा शुरू होने पर बिट्टू हमेशा की तरह जल्दी-जल्दी सारे प्रश्नो का उत्तर लिख लेता है और वही चिंटू प्रश्न पत्र देखकर उदास हो जाता है और मन में सोचता है “मै क्या लिखू, मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है ।”

उस परीक्षा में चिंटू अनुत्तीर्ण हो जाता है और रोते हुए बिट्टू से कहता है “बिट्टू, तुमने कहा था कि तुम मुझे अपनी उत्तर पुस्तिका दिखाओगे, लेकिन तुमने नहीं दिखाया, अब देखो,  मै अनुत्तीर्ण हो गया ।”

बिट्टू कहता है “चिंटू भाई, मुझे बहुत बुरा लग रहा है कि तुम अनुत्तीर्ण हो गए, लेकिन मै क्या करता, शिक्षक ने मुझे पायल के पास बैठा दिया था ।”

दोनों को साथ में खड़े बात करते देख शिक्षक उनके पास आते है और उन्हें समझते हुए कहते है “चिंटू, मुझे मालूम था कि तुमने पिछली परीक्षा में बिट्टू की उत्तर पुस्तिका से नक़ल करके परीक्षा दी थी, इसलिए मैंने जानबूझकर दोनों को अलग-अलग बैठाया था ।”

शिक्षक आगे कहते है “और बिट्टू, चिंटू से ज्यादा यह सीख तुम्हारे लिए है, अच्छे दोस्तों अपने दोस्त को गलत कम करने से रोकते है ना की उनकी गलतियों को छुपकर उन्हें बचते है ।”

इस kahani hindi for kids – नकलची दोस्त कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने दोस्तों की गलतियों को कभी छुपाना नहीं चाहिए बल्कि एक अच्छे दोस्त की तरह उन्हें गलती करने से रोकना चाहिए ।

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