चावल के किमती कंकड़ – Kahaniya in Hindi

Kahaniya in Hindi – एक बार की बात है जब एक शहर में एक मोनू नाम का लड़का रहता था । मोनू अपने घर में अपने माता पिता और बहन के साथ रहता था जिसका नाम रिया था । मोनू के दादा जी भी घर में साथ रहते थे ।

एक दिन मोनू की माँ चावल खरीदने बाजार जाती है, बाजार पहुंचते ही देखती है कि वहा एक नई दुकान खुली है दुकान देखकर वह सोचती है “अरे, यह तो नई दुकान है, आज सामान यही से लेती हूँ, नई दुकान है तो शायद सामान सस्ता और बढ़िया भी मिलेगा ।”

मोनू की माँ दुकान में जाती है और दुकानदर से कहती है “भैया, मुझे पांच किलो अच्छे वाले चावल चाहिए।”

दुकानदार मुस्कुराते हुए कहता है “जी बहन जी, मै अभी आपको अच्छे वाले चावल देता हूँ ।”

माताजी चावल लेकर घर चली जाती है और घर पहुंच जैसे ही वह खाना बनाने के लिए चावल निकलती है तो देखती है कि चावल में ढेर सारे कंकड़ रहते है ।

माताजी तुरंत दुकानदार के पास वापस जाती है और उसे कहती है “भैया, मैंने आपको अच्छे वाले चावल देने को कहा था लेकिन अपने जो चावल दिया है उसमे तो ढेर सारे कंकड़ है ।”

दुकानदार कहता है “नहीं-नहीं बहन जी, मैंने तो आपको अच्छे वाले चावल ही दिए थे, अब उसमे कंकड़ कहां से आ गए ये आप जानिए, मै चावल बेचता हूँ, कंकड़ नहीं । “

दुनकानदार की बात सुनकर माताजी को बहुत दुःख होता है और वह चुप-चाप घर वापस आ जाती है ।

घर पहुंचते ही माताजी का उदास चेहरा देखकर दादाजी पूछते है “क्या हुआ बहु, तुम इतनी उदास क्यों लग रही हो ?”

माताजी कहती है “पिताजी, मुझे एक दुकान वाले ने कंकड़ वाले चावल दे दिए और जब मै उसे वापस करने गई तो उसने चावल वापस नहीं लिए बल्कि उल्टा मेरे ऊपर ही आरोप लगा दिया ।”

उसी समय मोनू और रिया भी विद्यालय से घर वापस आ जाते है और अपने दादा जी से पूछते है “दादाजी, क्या बात हो गई, माँ इतनी उदास लग रही है ?

दादाजी उन्हें सारी बात बताते है, जिसपे मोनू कहता है “दादाजी, हमें उस दुकान वाले को सबक सीखना ही चाहिए, क्योकि आप ही तो कहते है न कि बुरे लोगो के सामने कभी हर नहीं माननी चाहिए और उन्हें सबक सीखना चाहिए ।”

दादाजी मोनू की बात सुनकर कुछ सोचते है फिर कहते है “सुनो तुम दोनों, मेरे पास एक तरकीब है ।”

दादाजी मोनू और रिया को उस दुकानदार को सबक सिखाने की तरकीब सुनाते है ।

फिर कुछ देर बाद दादाजी उसी दुकान पर जाते है और कहते है “भाई साहब, मुझे पांच किलो अच्छे वाले चावल चाइये ।”

दुकानदार दादाजी को वही कंकड़ वाले चावल देता है जो उसने मोनू की माताजी को दिया था ।

दादाजी चावल लेकर घर आ जाते है और फिर मोनू भी उस दुकान में जाता है और दुकानदार से वही चावल लेकर आता है ।

मोनू को कंकड़ वाले चावल देकर दुकानदार मन ही मन सोचता है “अरे वाह, सारे कंकड़ वाले चावल बिक गए, इसके कारण तो मुझे दोगुना फायदा हो गया ।”

फिर कुछ देर बाद रिया भी उस दुकान में जाती है और कहती है “मुझे एक किलो अच्छे वाले चावल चाहिए ।”

दुकानदार मन में सोचता है “अरे, वे चावल तो ख़तम हो गए, अब मुझे इस बच्ची को सच में अच्छे वाले चावल देने पड़ेंगे ।”

दुकानदार रिया को दूसरे चावल देता है जिसे देखकर रिया कहती है “मुझे वही कंकड़ वाले चावल चाहिए जो कुछ देर पहले मेरे दादाजी और मेरा भाई लेकर गया था ।”

रिया की बात सुनकर दुकानदार आश्चर्य में पड़ जाता है और रिया से पूछता है “बिटिया, तुम्हे कंकड़ वाले चावल क्यों चाहिए ?”

रिया कहती है “क्योकि जो कंकड़ आपने दिए है वे बहुत किमती है, मेरे दादाजी उन सारे कंकड़ को सुनार के पास लेजाकर बेचेंगे जिनकी किमत सोने और चांदी के बराबर है ।”

रिया की बात सुनते ही दुकानदार लालच में आ जाता है और तुरंत अच्छे और साफ सुथरे चावल लेकर रिया के घर जाता है और घर में घुसते ही दादाजी से कहता है “चाचाजी, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई जो मैंने आप लोगो को कंकड़ वाले चावल दे दिए, मै आप के लिए सच में अच्छे वाले चावल लेकर आया हूँ, कृपया ये रख लिए और सारे कंकड़ वाले चावल मुझे लौटा दीजिये ।”

दादाजी पहले तो कंकड़ वाले चावल वापस करने से मना करने का नाटक करते है लेकिन फिर मान जाते है ।

दुकानदार तुरंत सारे कंकड़ वाले चावल ले कर सोनार के पास जाता है बेचने के लिए और वहा पहुंचते ही सोनार उसपर हँसता है और उसे पागल कहकर उसका मज़ाक उडाता है ।

दुकानदार मन ही मन सोचता है “आजतक मै लोगो को ठगता रहा लेकिन आज मुझे किसी ने ठग लिया, अब आज के बाद मै किसी के साथ बेईमानी नहीं करूँगा ।”

इस Kahaniya in Hindi – चावल के किमती कंकड़ कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अगर कभी कोई हमारे साथ गलत करता है तो हमें उसे ज़रूर सबक सीखना चाहिए ताकि वह दुबारा किसी और के साथ गलत ना कर सके ।

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