सत्य की जीत | Moral stories in Hindi for class 1

Moral stories in Hindi for class 1 – एक बार की बात है जब एक गांव मे दो दोस्त रहते थे, एक का नाम था रमेश और दुसरे का नाम थे सुरेश । दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे लेकिन सुरेश स्वाभाव से बड़ा ही बड़ा ही बदमाश और मत्लभी थे वही रमेश एकदम सीधा और सरल ।

दोनों दोस्त गांव मे ही बढ़ई का काम करते थे लेकिन गांव मे उनकी आमदनी बहुत कम होती थी । फिर एक दिन सुरेश रमेश से कहता है “रमेश, क्यों ना हम शहर जा कर कुछ काम ढूंढते है, शहर मे आमदनी गांव से बहुत ज्यादा है ।”

रमेश सुरेश की बात मान जाता है और दोनों शहर जाते है और उन्हें एक बड़ा काम मिल जाता है ।

पूरे तीन महीने मेहनत करने के बाद उन्हें वह काम ख़तम करने पर एकसाथ ढेर सारा पैसा मिलता है, दोनों बहुत  खुश हो जाते है ।

फिर दोनों शहर से गांव वापस आने के लिए निकलते है और जैसे ही आधे रास्ते मे पहुंचते है तब सुरेश रमेश से कहता है “रमेश, हमारे पास बहुत सारा पैसा है और अभी बहुत अँधेरा हो चुका है, हम इसे लेकर गांव नहीं जा सकते क्योकि आगे का रास्ता एकदम सुनसान है और कोई भी हथियार दिखाकर ये पैसे हमसे ले सकता है ।”

रमेश सुरेश की बात सुनकर थोड़ा घबरा जाता है और कहता है “भाई सुरेश, तू बात तो बिल्कुल ठीक कर रहा है , लेकिन हम अब क्या कर सकते है ?”

सुरेश कहता है “हम एक काम करते है, सारे पैसे किसी पेड़ पर छुपा देते है और कल सुबह आकर इसे लेंगे लेंगे ।”

रमेश को सुरेश की बात ठीक लगती है और वह मान जाता है और दोनों अपने सारे पैसे एक पेड़ पर छुपकर गांव आ जाते है ।

फिर आधी रात को सुरेश उस पेड़ के पास वापस जाता है और अपना और रमेश दोनों के सारे पैसे निकाल लेटा है ।

फिर अगले सुबह जब दोनों पैसे निकालने के लिए पेड़ के पास पहुंचते है, सुरेश पेड़ पर चढ़ता है और ऊपर चढ़कर चिल्लाता है “रमेश यहाँ तो हमारे पैसे नहीं है, सारे पैसे कोई ले गया ।”

रमेश सुरेश की बात सुनकर एकदम घबरा जाता है और सुरेश से कहता है “थोड़ा ध्यान से देख, वही होंगे पैसे, पेड़ पर चढ़ कर कौन चोरी करेगा हमारे पैसे और तेरे और मेरे अलावा किसी को मालूम भी नहीं था इसके बारे मे ।”

सुरेश पेड़ से नीचे उतरता है और रमेश से कहता है “रमेश, तू सच सच बता दे, तूने ही चुराए है ना सारे पैसे ।”

रमेश डर जाता है और कहता है “नहीं सुरेश, मै क्यों चुराऊँगा तेरे पैसे, हम दोनों दोस्त है और मैंने कभी चोरी नहीं की है ।”

सुरेश नहीं मनाता है और गांव वापस आकर पूरे गांव मे बताता है कि रमेश ने उसके पैसे चोरी कर लिए ।

फिर सुरेश गांव के सरपंच के पास जाता है और कहता है “सरपंच जी, आप मेरे साथ चलिए और पेड़ से ही पूछ लेते है कि पैसे किसने चुराए ।”

सरपंच सुरेश की बात सुनकर हैरान हो जाता है और कहता है “सुरेश, पेड़ कैसे बताएगा कि पैसे किसने चोरी किये है ?”

सुरेश कहता है “सरपंच जी, मेरे पास एक मंत्र है और मेरे उस मंत्र को पढ़ने के बाद वह पेड़ बात करने लगेगा ।”

सरपंच सुरेश की बात मान लेता है और सभी लोग पेड़ के पास जाते है ।

वहां पचकर सुरेश आँख बंद करता है और मंत्र पढ़ने का नाटक करता है, कुछ देर बाद वह अपनी आँख खोलता है और पेड़ की तरफ देख करता कहता है ” ओ पेड़ महाराज, कृपया हमें बताइये, कल रात पैसे किसने चुराए ?”

सभी लोग शांत होकर ध्यान से देख रहे थे तभी पेड़ से आवाज़ आती है “कल रात रमेश आया था और वही सारे पैसे निकाले ।”

वहां खड़े सभी लोग हैरान हो जाते है फिर सुरेश कहता है “देखा सरपंच जी, मैंने कहाँ था ना कि रमेश ने ही पैसे चोरी किये है ।”

सुरेश की बात सुनकर रमेश कहता है “ये सब झूठ है, मैंने पैसे नहीं चुराए है ।”

फिर सुरेश कहता है “रमेश, यह पेड़ झूठ नहीं बोलता, पैसे तूने ही चुराए है ।”

रमेश पेड़ के चारो ओर घूम कर देखता है क्योकि उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि एक पेड़ कैसे बात कर सकता है तभी उसे पेड़ पर होती का एक हिस्सा लटकते हुए दिखता है और वह समझ जाता है कि क्या गड़बड़ है ।

फिर रमेश कहता है “सरपंच जी, ये पेड़ मुझे कोई शैतान लग रहा है और गांव के लोगो की जान भी ले सकता है, हमें इसे तुरंत जला देना चाहिए ।’

कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही रमेश उस पेड़ पर आग लगा देता है और जब आज तेज होती है तो पेड़ के पर से एक आदमी चिल्लाते हुए नीचे गिरता है ।

वहां खड़े सभी लोग हैरान हो जाते है क्योकि जो व्यक्ति पेड़ से गिरता है वह सुरेश के पिता रहते है ।

सरपंच तुरंत सुरेश के पिता से पूछता है “अरे, आप ऊपर क्या कर रहे थे ?”

फिर सुरेश के पिता सरपंच को सारी बात बताए हुए कहते है “सरपच जी, मेरे बेटे सुरेश ने ही मुझे ऐसा करने को कहाँ था और उसने ही सारे पैसे चोरी किये है ।”

अंततः रमेश को उसके सारे पैसे मिल जाते है और सुरेश को उसके किये गए काम की सजा मिलती है ।

इस Moral stories in Hindi for class 1 – सत्य की जीत कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी किसी के साथ बेमानी नहीं करनी चाहिए क्योकि अंत मे हमेश जो सत्य होता है वही जीतता है

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