ईमानदार रमन | Moral stories in Hindi for class 8

Moral stories in Hindi for class 8 – एक बार की बात है जब गांव मे एक रमन नाम का आदमी रहता था । रमन एक बहुत ही ईमानदार और मेहनती पेंटर था और गांव मे ही छोटे-छोटे घरो की पेंटिंग का काम करता था, लेकिन रमन बहुत गरीब था क्योकि जितना काम उसे मिलता उससे उसका घर नहीं चल पाता था, जिस कारण रमन खली समय मे छोटी-मोटे सामने को पेंट करने का भी काम ले लेता था ।

एक दिन रमन को गांव का एक बड़ा व्यापारी बुलाता है और कहता है “रमन, मेरे पास एक छोटी नाव है क्या तुम उसे पेंट कर दोगे और इसके कितने पैसे लगेंगे ?”

रमन जवाब देता है “जी सेठ जी, मै बिल्कुल पेंट कर दूंगा और इसके सिर्फ पांच सौ रुपये लगेंगे ।”

फिर व्यापारी कहता है “रमन, लेकिन तुम्हे यह काम आज दोपहर तक ख़तम करना होगा ।”

रमन जवाब देता है “जी सेठ जी, मै आज दोपहर तक ही काम पूरा कर दूंगा ।”

फिर रमन नदी के किनारे रखे नाव के पास जाता है और अपना काम चालू कर देता है ।

कुछ देर बाद रमन देखता है कि नाव के बीच मे एक छेद है जिसे देखकर वह सोचता है”अरे, यह तो इतना बड़ा छेद है, मुझे पहले इसे ठीक करना पड़ेगा, उसके बाद ही मै पूरी नाव पेंट कर पाउँगा ।”

फिर रमन कुछ सामान लाकर उस छेड़ को ठीक कर देता है और सही समय पर पूरा काम ख़तम कर लेता है ।

रमन जैसे ही काम ख़तम करता है वहां पर व्यापारी पहुंच जाता है और रमन का काम देखकर उसे कहता है “रमन, तुमने तो बहुत ही बढ़िया काम किया है, मै बहुत खुश हूँ, तुम तुम्हारे पैसे कल सुबह मेरे घर आकर ले लेना ।”

रमन वयापारी को हां मे जवाब देता है और अपने घर चला जाता है ।

कुछ देर बाद व्यापारी की पत्नी और बच्चे नाव पर नदी मे सैर करने के लिए जाते है और इसी बीच व्यापारी के घर पर उसका का एक कर्मचारी जो उस नाव की देख-रेख करता था वह आता है और कहता है “सेठ जी, कल मै आप को बताना भूल गया था कि उस नाव मे एक छेद भी है, तो जब आप नाव को पेंट करवाएंगे तो उस छेद को भी ठीक करवा लीजियेगा ।”

व्यापारी अपने कर्मचारी की बात सुनकर एकदम घबरा जाता है और कहता है “क्या, नाव मे छेद था, लेकिन मैंने तो सर्फ पेंट करवाया है और अब तो उसमे मेरी पत्नी और बच्चे नदी मे सैर के लिए भी चले गए है ।”

व्यापारी तुरंत नदी की तरफ जाता है और आधे रास्ते तक ही पंहुचा पाता है वैसे ही देखता है कि उसकी पत्नी और बच्चे वापस आ रहे है ।

व्यापारी उन्हें देखकर खुश हो जाता है और अपनी पत्नी से पूछता है “क्या तुम लोग नदी मे सैर के लिए नहीं गए थे ?”

पत्नी कहती है “हम सब तो सैर कर के वापस भी आ गए, लेकिन आप इतने घबराए हुए क्यों दिख रहे है ?”

वयापारी उस समय अपनी पत्नी से कुछ नहीं कहता है और समझ जाता है कि रमन ने ही उस नाव के छेद को बिना कुछ कहे ठीक कर दिया है ।

अगले दिन सुबह रमन व्यापारी के पास आता है और व्यापारी उसे उसके पैसे देता है ।

रमन पैसे गिनता है तो देखता है कि व्यापारी ने पांच सौ नहीं बल्कि पांच हजार दिए है, रमन तुरंत व्यापारी से कहता है “सेठ जी, आपने गलती से मुझे ज्यादा पैसे दे दिए है ।”

व्यापारी रमन से कहता है “नहीं रमन, मैंने तुम्हे सही पैसे दिए है, पांच सौ नाव को पेंट करने के और बाकी के पैसे नाव के छेद को ठीक करने के ।”

व्यापारी की बात सुनकर रमन कहता है “सेठ जी, लेकिन छेद ठीक करने मे तो इतना खर्चा नहीं आया था ।”

व्यापारी कहता है “रमन, तुमने मेरे बिना कहे नाव के छेद को ठीक कर दिया और उसके लिए तुमने अलग से पैसे भी नहीं मांगे और आज तुम्हारे कारण ही मेरी पत्नी और बच्चे जिन्दा है, इसके लिए मै तुम्हे बहुत-बहुत धन्यवाद् देता हूँ”

इस Moral stories in Hindi for class 8 – ईमानदार रमन की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें हमेशा अपना काम ईमानदारी से करना चाहिए क्योकि इससे हम खुद भी नुकसान से बचते है और कभी दूसरो को भी बचा लेते है ।

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