कंजूस व्यापारी – Panchatantra ki kahaniya

Panchatantra ki kahaniya – एक बार की बात है जब एक गांव में एक व्यापारी रहता था । व्यापारी बड़ा ही कंजूस था और कभी भी किसी के ऊपर बिना किसी मतलब के एक रुपये भी खर्च नहीं करता था ।

एक बार व्यापारी की पत्नी एक लड़की को जन्म देती है जिससे व्यापारी, उसकी पत्नी और उसका पूरा परिवार खुश हो जाता है तभी व्यापारी की पत्नी उससे कहती है “सुनिए जी, घर में लक्ष्मी आई है तो हमें ब्राम्हड़ भोज का आयोजन करना चाहिए, घर ब्राम्हड़ आएँगे, स्वादिष्ट भोजन खाएंगे और हमें और हमारी बच्ची को ढेर सारा आशीर्वाद देंगे ।”

व्यापारी अपनी पत्नी की बात मान लेता है और घर के नौकर से कहकर ब्राम्हड़ों तक निमंत्रण पंहुचा देता है, लेकिन व्यापारी अपने व्यव्हार से मजबूर मन में सोचता है “दस, बारह ब्राम्हड़ तो आएँगे ही, कितना खर्चा हो जाएंगे मेरा, मुझे कोई तरकीब सोचनी पड़ेगी जिससे ब्राम्हड़ों का सम्मान भी हो जाए और मेरे पैसे भी बच जाए । “

अगले दिन ब्राम्हड़ व्यापारी के घर आते है और भोजन करने के लिए बैठते है, भोजन की थाली लगाकर उसमे दो-दो लड्डू डालकर व्यापारी ब्राम्हड़ो से कहता है “आज आप सभी को एक परीक्षा देनी होगी और अगर आप सभी उस परीक्षा में उत्तीर्ण होंगे तो ही आपको पूरा भोजन दिया जाएगा और अगर आप अनुत्तीर्ण हो गए तो आप सभी को सिर्फ इन दो लड्डुओं से ही अपना मन भरना पड़ेगा ।”

व्यापारी की बात सुनकर पहले तो सभी ब्राम्हड़ थोड़े नाराज़ होते है फिर उन्हें लगता है कि व्यापारी ऐसी क्या परीक्षा ले लेगा जिसमे वे उत्तीर्ण ना हो पाए और सभी परीक्षा के लिए तैयार हो जाते है ।

फिर व्यापारी कहता है “आप सभी की थाली में जो लड्डू रखे हुए है आपको सभी को उन्हें खाना है लेकिन कहते समय आपका हाथ मुड़ना नहीं चाहिए और ना ही आप थाली में अपना मुँह डाल सकते है।”

व्यापारी की बात सुनकर सभी ब्राम्हड़ परेशान हो जाते है और सोचने लगते है कि बिना हाथ मोड़े और बिना थाली में मुँह डाले कोई कैसे खा सकता है ।

व्यापारी सभी ब्राम्हड़ों को परेशांन होता देख मन ही मन खुश होते हुए सोचता है “आज मेरा सारा खर्चा बच जाएगा, मैंने ऐसी परीक्षा दी है कि कोई इसमें उत्तीर्ण हो ही नहीं सकता । “

सभी ब्राम्हड़ अपने-अपने तरीके से लड्डू को खाने की कोशिश करते है लेकिन कोई भी सफल नहीं हो पाता तभी उनमे से एक ब्राम्हड़ चतुराई दिखाते है और कुछ सोचने के बाद सभी से कहते है “देखिये, हम सभी अपने बगल में बैठे अपने साथी को लड्डू खिलाएंगे, इससे ना हमें थाली में मुँह डालना पड़ेगा और ना ही खिलाते समय हमारा हाथ मुड़ेगा ।”

कुछ देर बार सारे ब्राम्हड़ लड्डू खा कर ख़तम कर देते है  जिसे देखकर व्यापारी हैरान हो जाता है कि कैसे ब्राम्हड़ अपनी परीक्षा में उत्तीर्ण हो गए है और अब उसे सभी को ढेर सारा भोजन खिलाना पड़ेगा ।

फिर एक ब्राम्हड़ जिन्होंने तरकीब निकली थी वे हँसते हुए व्यापारी से पूछते है “क्यों व्यापारी, पैसे बचने का बहुत प्रयत्न किया ना तुमने, अब तुम्हे हमें भोजन खिलाना ही पड़ेगा ।”

फिर सभी ब्राम्हड़ हंसने लगते है और व्यापारी शर्मिंदा होकर सभी से क्षमा मांगता है और आगे ऐसी गलती कभी नहीं करने का वचन देता है ।

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