मेंढक और सांप | Panchatantra short stories in Hindi with moral

इस Panchatantra short stories in Hindi with moral में आप पढ़ेंगे कि कैसे एक मेंढक सांप पे भरोसा करता है और सांप धोखा देकर उसके ही बच्चे को खाता है चलिए कहानी पढ़ते है :-

Panchatantra short stories in Hindi with moral – एक बार की बात है जब एक गांव में एक कुआँ था, उस कुए में  एक पिंटू नाम का मेंढक रहता था, उसके साथ  उसका परिवार और कुछ और मेंढक भी रहते थे ।

पिंटू को वहां के सारे मेंढक बहुत चिढ़ाते थे और बात-बात पे उसका मज़ाक उड़ाते थे, इन सब बातो से पिंटू बहुत परेशान रहता था ।

एक दिन जब सारे मेंढक पिंटू को परेशान कर रहे थे तब पिंटू ने मन ही मन सोचा की मुझे इन सभी को सबक सिखाना ही पड़ेगा ।

पिंटू कुऍ से बहार निकलता है और पास में ही एक सांप का बिल था, वहां जाकर सांप को बिल से बहार निकलने को कहता है ।

सांप बाहर निकलके पिंटू को देखकर आश्चर्य चकित हो जाता है और पिंटू से पूछता है “अरे पिंटू, तुम यहाँ कैसे, आज मुझसे डर नहीं लग रहा है क्या ?”

पिंटू सांप को जवाब देते हुए कहता है “सांप भाई, डर तो बहुत लग रहा है लेकिन मै बड़ी हिम्मत करके आपके पास आया हूँ, आप कृपया मुझे मत खाना, मै आपको और भी बहुत सारा खाना देने आया हूँ “

सांप पिंटू से पूछता है “और खाना ? और खाना कहां है ?”

पिंटू सांप को सारी  बात बताता है कि कैसे उसके आस-पास के सारे मेंढक उससे कैसा व्यवहार करते है ।

फिर सांप पूछता है “तो पिंटू, इसमें मै तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूँ ?”

पिंटू सांप से कहता है ” आप मेरे साथ चलिए और कुऍ के पास में ही झाड़ियों में छुप जाना और जब शाम को हम सभी कुऍ से बाहर खेलने के लिए निकलेंगे तो आप चुपके से आकर सारे मेंढको को खा जाना”

पिंटू की सारी बाते सुनकर सांप बड़ा खुश होता है और कहता है “ठीक है पिंटू, मै तुम्हारे साथ चलूँगा “

पिंटू आखरी में सांप से कहता है “सांप भाई, लेकिन आप मुझे एक आश्वासन दीजिये कि आप मुझे और मेरे परिवार को नहीं खाएंगे, मेरे परिवार में मेरी पत्नी और एक बच्चा है ।”

सांप पिंटू से कहता है “अरे पिंटू, ये कैसी बात कर रहे हो, भला मै तुम्हे और तुम्हारे परिवार को कैसे खा सकता हूँ , तुम तो मेरी मदद कर रहे हो, मुझे इतना सारा खाना दे रहे हो ।”

पिंटू सांप को लेकर कुए के पास आता है और झाड़ियों के अंदर छुपा देता है ।

पिंटू की पत्नी पिंटू को सांप के साथ आते हुए देख लेती है और जैसे ही पिंटू कुए के अंदर आता है उससे पूछती है “पिंटू जी, ये आप क्या कर रहे है, सांप को यहाँ पर क्यों ले कर आ गए और सांप ने आपको कैसे कुछ नहीं किया ?”

पिंटू अपनी पत्नी को सारी बात बताता है लेकिन पिंटू की पत्नी पिंटू को मना करते हुए कहती है”पिंटू जी, आप एक सांप पर कैसे भरोसा कर रहे है ? “

पिंटू अपनी पत्नी से कहता है “तुम चिंता मत करो, मैंने सांप को लालच दिया है और उसने मुझे आश्वासन दिया है कि वो हमें नहीं खाएगा ।”

शाम होती है और सारे मेंढक कुऍ के बाहर आ जाते है और फिर पिंटू सांप को इशारा करता है, सांप झाड़ियों से बाहर आता है और सारे मेंढको को खा जाता है ।

अब कुए में सिर्फ पिंटू, उसकी पत्नी और उसका बच्चा बस रहते है ।

कुछ दिन बीतते है और सांप को से भूख लगती है और वह फिर से कुऍ के पास आकर झाड़ियों में छुप जाता है ।

इस बार सिर्फ पिंटू की पत्नी और बच्चा कुऍ से बाहर निकलते है और सांप पिंटू के बच्चे को खा लेता है ।

पिंटू की पत्नी कुऍ में आकर रो-रो कर पिंटू को बताती है कि सांप ने उनके बच्चे को भी खा लिया ।

यह बात सुनकर पिंटू को गुस्सा आता है कि सांप कैसे अपनी कही हुई बात से पलट गया और उसके बच्चे को खा गया ।

वह तुरंत गुस्से में सांप के पास जाता है और सांप को चिल्ला कर कहता है “सांप भाई, तुमने ये बहुत गलत किया मेरे साथ, तुमने मुझे आश्वासन दिया था कि तुम मेरे परिवार को नहीं खाओगे फिर तुमने मेरे बच्चे को क्यों खाया  ?”

सांप कहता है “पिंटू भाई, मै क्या करता, मुझे बड़ी ज़ोरो कि भूख लगी थी, कही और कुछ खाने का मिल ही नहीं रहा था इसलिए मुझे तुम्हारे बच्चे को खाना पड़ा और मुझे अभी और भूख लग रही है तो मुझे तुम्हे ही खाना पड़ेगा ।”

सांप की बात सुनकर पिंटू डर जाता है कि सांप अब उसे भी खाने की बात कर रहा है ।

फिर वह चतुराई से सांप से कहता है “सांप भाई आप मुझे मत खाइये, पास में ही मेरे और भी दोस्त रहते है तो मै उनको यहाँ ले आता हूँ और आप उनको खा लेना ।”

सांप पिंटू की बात सुनकर फिर से लालच में आ जाता है और उसकी बात मानकर उसे जाने देता है ।

पिंटू सांप के पास से निकलकर अपनी पत्नी के पास जाता है और फिर वो दोनों वह से बहुत दूर भागा जाते है और इस तरह से पिंटू सांप से अपनी जान बचा लेता है ।

इस – Panchatantra short stories in Hindi with moral मेंढक और सांप कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें कभी भी अपने दुश्मन पे भरोसा नहीं करना चाहिए क्योकि ऐसा करने से अंत में हमें ही नुकसान पहुंचेगा ।

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