चालाक व्यापारी | Short moral stories in Hindi for class 8

short moral stories in Hindi for class 8 – एक बार की बात है जब एक गांव मे एक आदमी रहता था, वह पढ़ा-लिखा नहीं था और गांव मे ही छोटे-मोटे काम कर अपना और अपने परिवार को पालता था । एक दिन उस आदमी को अपने घर की साफ़-सफाई करते समय उसके दादा का एक पुराना चांदी का बड़ा सा कटोरा मिलता है। आदमी कटोरा देखकर खुश हो जाता है और तुरंत उसे बेचने के लिए बाजार मे जाता है ।

एक सुनार की दुकान मे पहुंचकर आदमी कहता है “भैया, यह चांदी का कटोरा मुझे बेचना है, आप इसके कितने पैसे देंगे ?”

दुकानदार कहता है “देखिये भैया, वैसे ये कटोरा तो मुझे बहुत पसंद आया और मै इसे खरीदना भी चाहता हूँ लेकिन  अभी मेरे पास आपको देने के लिए एक भी पैसे नहीं है क्योकि मैंने अभी आपके आने से पहले एक ग्राहक से सामान खरीदकर उसे सारे पैसे दे दिए है “

आदमी निराश हो जाता है और अपना कटोरा वापस मान कर दुकान से जाने लगता है तभी दुकानदार कहता है “भैया सुनिए, मेरे पास एक गाय का बछड़ा है, मै आपको वह दे सकता हूँ और उसकी कीमन आपने इस कटोरे से कही ज्यादा भी है और जब वो बड़ी हो जाएगी तो आपको उसके दूध से बहुत फायदा भी होगा ।”

आदमी को दुकानदार की बात सही लगती है और वह कटोरा देकर बछड़ा लेकर अपने घर की ओर निकाल जाता है ।

रास्ते मे कुछ व्यापारी उस आदमी को बछड़े के साथ जाते हुए देखते है और एक व्यापारी कहता है “अरे वाह, कितना सुन्दर बछड़ा है, ये बछड़ा अगर मुझे मिल जाए तो कितना अच्छा होगा, ये बड़ी हो जाएगी तो मुझे इससे कितना फायदा हो सकता है ।”

दूसरा व्यापारी कहता है “सुनो, वह आदमी दिखने मे सीधा लग रहा है, चलो उसे बेवकूफ बनाकर वह बछड़ा ले लेते है ।”

फिर वह व्यापारी अपने साथी व्यापारियों को तरकीब समझाता है और वे एक-एक करके उस आदमी के पास जाते है ।

पहला व्यापारी आदमी के पास जाता है और उसे कहता है “अरे वाह, कितना सुन्दर बछड़ा है, लेकिन तुम इतने छोटे से बछड़े को चलते हुए क्यों लेकर जा रहे हो, बिचारा थक जाएगा और बीमार पड़ जाएगा ।”

आदमी उस व्यापारी की बात मान लेता है और बछड़े को अपनी गोद मे उठा लेता है ।

थोड़ी दूर चलने के बाद दूसरा व्यापारी आदमी के पास आता है और कहता है अरे, ये क्या, तुम एक गधे को गोद मे बिठा कर चल रहे हो, इसमें तो तुम्हे अपना सामान रखकर चलना चाहिए ।”

आदमी व्यापारी से कहता है “अरे भाई साहब, ये गधा नहीं गाय का बछड़ा है ।”

व्यापारी कहता है “अरे नहीं भाई, आपको शायद किसी ने बेवकूफ बनाया है, यह तो गधा है, मेरे पास भी एक गधा है और वह बिल्कुल ऐसा ही दिखता है ।”

आदमी को व्यापारी की बात सही लगने लगती है और वह बछड़े को नीचे उतारता है और उसके ऊपर अपना सामान रखकर चलने लगता है ।

थोड़ी और दूर चलने के बाद तीसरा व्यापारी आता है और उस आदमी से कहता है “अरे भाई, ये क्या, तुम्हारे साथ एक गधा है और तुम पैदल चल रहे हो, तुम्हे तो इसके ऊपर आराम से बैठकर जाना चाहिए, आखिर गधे का तो काम ही यही है ।”

आदमी फिर से उस तीसरे व्यापारी की बात भी मान लेता है और उस बछड़े के ऊपर बैठ जाता है । जैसे ही आदमी बछड़े के ऊपर बैठता है, बछड़ा भार नहीं सह पाता और नीचे गिर जाता है ।

यह सारी चीज़े वे व्यापारी पास मे ही एक पेड़ के पीछे छुपकर देख रहे थे और हंस रहे थे ।

फिर आदमी ज़मीन से उठता है और उस उस बछड़े पे चिल्लाता है “तुझे मैंने अपना इतना महंगा कटोरा देकर खरीदा है लेकिन तू तो कुछ भी काम का नहीं निकला, चल भाग यहाँ है ।” ऐसा कहकर आदमी बछड़े को भगा देता है और वहां से चला जाता है ।

आदमी जैसे ही वहां से जाता है सारे व्यापारी तुरंत उस बछड़े को पकड़ लेते है और उनमे से एक व्यापारी कहता है “देखा, कैसे हमने उस आदमी को बेवकूफ बनाया और इतना सुन्दर बछड़ा मुफ्त मे ले लिया ।”

इस Short moral stories in Hindi for class 8 – चालाक व्यापारी की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमेशा हमेशा अपने आप पे भरोसा होना चाहिए नहीं तो छोटी-छोटी बातो पर भी कोई हमें मुर्ख बना सकता है ।

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