चालाक सियार की कहानी | Short moral stories in Hindi

Short moral stories in Hindi – एक बार की बात है जब जंगल में एक बकरी अपने झुण्ड से बिछड़ कर गलती से जंगल के अंदर चली जाती है, वहा उसे एक भेड़िया बैठा हुआ मिलता है, वह बकरी उस भेड़िये को देखकर एकदम डर जाती है और कांपने लगती है ।

तभी भेड़िया उस बकरी से कहता है “डरो मत बकरी, मै तुम्हे नहीं खाऊंगा क्योकि मैंने अभी अभी खाना खाया है और मेरा पेट पूरी तरह से भरा हुआ है पर तुम अकेली जंगल के अंदर कहां घूम रही हो ?”

भेड़िये की बात सुनकर बकरी भेड़िये को धन्यवाद् कहती है और जवाब देती है ” मै अपने झुण्ड के साथ ही जंगल में आई थी लेकिन किसी सोच में डूब गई और झुण्ड से अलग हो गई “

इस तरह बात करते करते बकरी और भेड़िये में बहुत अच्छी दोस्ती हो गई ।

कुछ समय बाद बकरी ने अपने बच्चे को भेड़िये और उसके बच्चे से मिलाया और दोनों बच्चो में भी एकदम गहरी दोस्ती हो गई ।

एक तरफ बकरी और भेड़िया हमेशा साथ में ही घुमा करते थे वही दोनों के बच्चे भी एकदूसरे के साथ खेल कूद करने लगे ।

इसी बीच दोनों बच्चो पर जंगल के एक सियार की नज़र पड़ती है और वह उन बच्चो को खाने के बारे में सपने देखना चालू कर देता है, वह हमेशा मन ही मन सोचता है की कब मुझे इन बकरी और भेड़िये के बच्चो को मार कर खाने मिलेगा ।

समय बीतता गया और वो दोनों बकरी और भेड़िये के बच्चे बड़े हो गए ।

एक दिन खबर आती है कि बकरी और भेड़िया दोनों का एक शेर ने शिकार कर लिया है और वो दोनों मर चुके है  ।

यह खबर सुनकर सियार खुश हो जाता है और सोचता है कि अब मेरे पास बोहोत अच्छा मौका है बकरी और भेड़िये के बच्चो को खाने का ।

लेकिन सियार के साथ एक मुसीबत यह रहती है कि वो दोनों बच्चे अब काफी बड़े हो चुके है और सियार उनसे अकेले लड़कर उन्हें मार नहीं सकता ।

तभी सियार के मन में एक चालाकी भरी तरकीब आती है की अगर वह उन दोनों दोस्तों को आपस में ही लड़ा दे तो उसका काम बन जाएगा ।

उधर बकरी और भेड़िया दोनों ही अपनी अपनी माँ के मर जाने से दुखी होकर अपने घर में बैठे रहते है ।

सियार पहले बकरी के पास जाता है और भड़काने के लिए उसे कहता है कि मै अभी भेड़िया से मिला और वो मुझे कह रहा था कि अब मेरी माँ नहीं रही तो मै उस बकरी से दोस्ती तोड़ दूंगा क्योकि वह बकरी डरपोक है इसीलिए वह अपने आपको बड़े जानवरो से बचाने के लिए मेरे साथ घूमती है 

सियार कि बात सुनकर बकरी को गुस्सा तो आता है पर वह शांत हो जाती है ।

फिर सियार वहा से भेड़िया के पास जाता है और उसे कहता है कि मै अभी बकरी से मिला और वह मुझे कह रही थी कि भेड़िया स्वाभाव से बहुत ही बुरा है जिस कारण उससे कोई दोस्ती नहीं करता है जंगल में इसीलिए वो हमेशा मेरे साथ ही घूमता है ।

सियार कि बात सुनकर भेड़िये को बड़ा गुस्सा आता है पर वह भी शांत हो जाता है ।

फिर कुछ दिनों बाद भेड़िये और बकरी में किसी छोटी सी बात में झगड़ा हो जाता है और वह झगड़ा बहुत ही बढ़ जाता है क्योकि उस सियार कि बात बकरी और भेड़िया दोनों के दिमाग में चलती रहती है ।

भेड़िया बकरी के ऊपर पूरी ताकत लगा के हमला करता है तो वहीं बकरी का शरीर भी बहुत मजबूत रहता है और वह भेड़िये के हमले का पूरी ताकत लगाकर जवाब देती है ।

दोनों कि लड़ाई इतनी बढ़ जाती है और घंटो लड़ने के बाद दोनों ही एक दुसरे को मार देते है ।

सियार यह पूरी लड़ाई छुप कर देख रहा होता है और इस समय का इंतज़ार कर रहा होता है कि कब दोनों एक दुसरे को मार दे और जैसे ही दोनों मर जाते है सियार वहा पहुँचता है और ज़ोर ज़ोर से हसकर बोलता है ” मूर्खो, कैसे मैंने तुम दोनों के एक दुसरे के खिलाफ भड़काया और तुम इतने अच्छे दोस्त होते हुए भी एक दुसरे पर विश्वास नहीं कर सके और मेरी बातो को मान लिया। अब मै अपने सारे दोस्तों के साथ इतने सारे मांस का हफ्ते भर तक मज़ा लूँगा “

इस Short moral stories in Hindi – एक चालाक सियार की कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि कभी भी हमें अपने सबसे अच्छे दोस्त पर संदेह नहीं करना चाहिए ।

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