व्यापारी और उसका गधा – Story Hindi Cartoon

Story Hindi Cartoon – एक बार की बात है जब किसी गांव में एक गरीब व्यापारी रहता था। वो प्रतिदिन कपड़ो की गठरी अपने कंधे पर लेकर अन्य गांव में बेचने जाता था। उसका रोज़ नियम था कि शाम को घर जाने से पहले एक मंदिर में रुकता था और अपनी कमाई में से कुछ हिस्सा भगवान को अर्पित करता था।

इसी कारण उसकी मंदिर के पुजारी से अच्छी दोस्ती हो गयी। एक दिन मंदिर के पुजारी ने उसे एक गधा देते हुए कहा कि तुम रोज़ कपडे बेचने पैदल जाते हो। इससे अच्छा तो ये गधा ले जाओ और अपना माल इस गधे पर रख कर बेचो।

उस व्यापारी को पुजारी का सुझाव बड़ा अच्छा लगा और उसने वो गधा ले लिया तथा अगले दिन से वो अपना सामान गधे पर लाद कर बेचने लगा।

धीरे-धीरे उसका व्यापार बढ़ने लगा और व्यापारी के दिन सुधरने लगे। व्यापारी अब भी पहले की तरह ही प्रतिदिन शाम को मंदिर में रुकता और अपनी कमाई का कुछ हिस्सा मंदिर में अर्पित करता, लेकिन एक दिन गधा बीमार हो गया तथा काफी कोशिश के बाद भी ठीक नहीं हुआ और आखिर एक दिन गधे की मृत्यु हो गई।

व्यापारी दुखी हो गया क्यूंकि व्यापारी को गधे से बहुत लगाव हो गया था, इसलिए व्यापारी ने सोचा कि क्यों ना गधे की याद में गधे की समाधी बना दी जाये।

व्यापारी गधे की समाधी बनाकर उसे प्रणाम कर रहा था तभी उधर से एक आदमी वहा से गुजर रहा था जो काफी दुखी था, वो व्यापारी को देखकर उसके पास आता है और से पूछता है “भाई ये किसकी समाधी है।”

व्यापारी बोलता है “ये वो आत्मा है जो मेरे लिए किसी परमात्मा की तरह पूजनीय है, इसने मेरा जीवन बदल दिया , मेरे व्यापार को चार चाँद लगा दिया तथा मेरे जीवन को खुशहाल कर दिया।

आदमी को लगा की किसी बहुत ही पवित्र आत्मा की समाधी है। उसने समाधी को प्रणाम करते हुए मन्नत मांगी  तथा पूरी होने पर वापस आने का वादा करके वहां से चला गया।

गांव में जाकर उसने अन्य लोगो को भी उस समाधी बारे में बताया कि कैसे उस समाधी की वजह से उस व्यापारी का जीवन बदल गया।

कुछ ही समय में बात अन्य गावों में फ़ैल गयी और सभी उस समाधि पर मन्नत मांगने आने लगे। अब उस व्यापारी का काम समाधी पर आने वाले चढ़ावे से ही चल जाता था इसलिए उसने अपना कपड़े बेचने का व्यापार बंद कर दिया और समाधी पर ही रहने लगा।

एक दिन वो पुजारी जिसने व्यापारी को वो गधा दिया था, व्यापारी के पास आता है और पूछता है कि आखिर ये पवित्र समाधी किसकी है जो इतने कम समय में ही इतनी मशहूर हो गयी।

व्यापारी बोलता है तुम मेरे मित्र हो इसलिए बता रहा हूँ लेकिन तुम ये बात किसी और को मत बताना कि ये समाधी उसी गधे की है जो कभी तुमने मुझे भेंट स्वरुप दिया था।

व्यापारी की बात सुनकर पुजारी थोड़ा मुस्कुराता है, लेकिन तभी व्यापारी उस पुजारी से पूंछता है “तुम जहाँ पूजा करते हो वो समाधी किसकी है ?”

इस पर पुजारी भी कहता है कि तुम मेरे मित्र हो इसलिए बता रहा हूँ, लेकिन तुम भी ये बात किसी को मत बताना की वो समाधी जहाँ में पूजा करता हूँ किसी और की नहीं बल्कि इसी गधे की माँ की है। थोड़ी देर दोनों एक दूसरे की तरफ देखते है और मुस्कुराते हुए दोनों गधो को धन्यवाद देते है।

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