लम्बी आयु देने वाला फल – Tenaliram ki kahani

Tenaliram ki kahani – विजय नगर एक धन सम्पन्न राज्य था । यहाँ के व्यापारी पूरे विश्व के व्यापारियों के साथ व्यापर करते थे । राज्य में धन की कोई कमी नहीं थी, ऐसे में महाराज और दुसरे देशो के राजाओ के बीच मेहेंगे उपहारों का आदान-प्रदान चलता रहता था ।

एक बार राजा कृष्णा देव राय को चीन के सम्राट ने एक फल का टोकरा उपहार में भेजा । यह फल विजय नगर में नहीं उगता था । चीन के राजा ने सन्देश में कहलवाया था कि यह लम्बी आयु प्रदान करने वाला फल है ।

महाराज के सामने बड़े से बक्से में से फल निकाले गए, फलो के बक्से देखकर सबके मुँह में पानी आ

 रहा था । सभी उन फलो को ललचाये नज़रो से देख रहे थे और उनका स्वाद लेना चाहते थे ।

पर यह संभव नहीं था वह उपहार तो राजा के लिए था और जब तक महाराज उसे चख ना ले तब तक किसी की हिम्मत नहीं थी कि उन्हें छू भी ले ।

तभी वहां उपस्थित तेनाली राम की नज़र उन फलो पड़ी और फलो को देखकर वे भी इन्हे चखने की इच्छा में यह भूल गए कि वे फल तो पहले महाराज को चखने थे ।

तेनाली आगे आए और एक फल उठाकर झट्ट से मुँह में रख लिया । दरबारियों ने हैरानी से तेनाली को देखा और फिर महाराज को देखा, तेनाली की हरकत से महाराज का चेहरा गुस्से से लाल हो रहा था ।

महाराज गरजते हुए बोले, “तेनालीराम ये क्या कर रहे हो ?”

और अचानक तेनालीराम को एहसास हुआ कि वे ये क्या कर बैठे है, उनका यह अपराध माफ़ करने लायक नहीं था, यह तो महाराज के लिए उपहार था, वे उसे महाराज के चखने से पहले ही उठाकर खा गए और इससे भी बदतर बात यह थी कि उन्होंने इसे खाने के लिए महाराज की अनुमति भी नहीं ली ।

तेनाली बड़ी मुसीबत में फस चुके थे और जिसके कारन वे शर्मिंदा होकर चुप-चाप सिर झुककर खड़े हो जाते है ।

महाराज गुस्से में कहते है “तेनाली, तुमने मेरे उपहार को छूने का दुस्साहस कैसे किया, मै ऐसे बर्ताव को क्षमा नहीं कर सकता, सैनिको, इसे यहाँ से ले जाओ और मौत के घात उतरदो ।”

सिपाहियों ने उसी समय तेनाली को बंदी बना लिया ।

तेनाली को बचने के लिए कोई ना कोई उपाय निकलना था, ताकि अपनी जान बचा सके, तभी तेनाली ज़ोर-ज़ोर से रोने लगते है “चीन का सम्राट झूठ बोलता है, उसने कहा था कि इस फल को खाने से आयु लम्बी होती है लेकिन मैंने तो एक ही टुकड़ा खाया था और मेरी मौत का आदेश आ गया महाराज, विनती करता हु, कृपया आप इस फल को कभी मत खाना ।”

यह सुनकर महाराज की हंसी छूट गई और उन्होंने सिपाहिये से कहा कि वे तेनाली को छोड़ दे ।

फिर तेनाली बोले “महाराज दरअसल इस फल का स्वाद और खुशबू इतनी अच्छी है कि इसे देखकर रहा नहीं नहीं गया, आज इन फलो देखकर मेरा डोल गया और मै इन्हे खाने की भूल कर बैठा, बेशक इन फलो पर आपका अधिकार है, हम आम लोग है हमारे भाग्य में ऐसे दुर्लभ फलो का स्वाद नहीं होता ।

तेनाली की बात सुनकर महाराज को अपनी भूल का एहसास होता है और वे कहते है “तेनाली,हमारे साथ तुम सब लोग भी ख़ास हो, हम सब मिलकर इन फलो का स्वाद चखेंगे ।”

फिर महाराज ने सभी दरबारियों के साथ मिलकर उन फलो का आनंद लिया ।

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