सकारात्मक सोच | Very short moral stories in Hindi

Very short moral stories in Hindi – एक समय की बात है जब एक बड़े से राज्य में एक मंत्री था । मंत्री हमेशा सकारात्मक रहता था, कुछ भी होने पर एक ही बात कहता जो होता है अच्छे के लिए होता है ।

एक दिन मंत्री का बेटा घोड़े पर बैठ कर जा रहा था और रास्ते में वह गिर गया, जिसके कारण उसका पैर टूट जाता है ।

उसके उपचार के बाद वैद्य मंत्री से कहता है कि आपके बाटे की टांग काटनी पड़ेगी । वैद्य की बात सुनकर मंत्री  परेशान और दुखी हो जाता है ।

मंत्री यह बात राजा को बताता है और राजा भी यह बात सुनकर दुखी होते हुए मंत्री से कहता है “मंत्री जी, मेरी सहानुभूति आपके साथ है, इस बात का मुझे भी बड़ा दुःख हो रहा है, आपको जो भी मदद चाहिए आप मुझसे मांग सकते है ।”

मंत्री राजा को जवाब देते हुए कहता है “राजा जी, मदद के लिए धन्यवाद्, लेकिन मेरा मानना है जो होता है अच्छे के लिए होता है ।”

राजा मंत्री की बात सुनकर आश्चर्य में पड़ जाता है और कहता है “मंत्री जी, आपके बेटे का एक पैर कट गया है, इसमें अच्छा क्या हो सकता है ? “

मंत्री कहता है “राजा जी, एक पैर होने के कारण अब मेरे बेटे को एक जूता पहनना पड़ेगा, जिससे एक जूते की बचत होगी, जिससे मेरा खर्चा कम होगा ।”

एक दिन राजा अपने महल में तलवार चलने का अभ्यास कर रहा था तभी अचानक तलवार se उसकी उंगली कट के गिर जाती है ।

वहा खड़ा मंत्री अपनी आदत के अनुसार कहता है “कोई बात नहीं राजा जी, जो होता है अच्छे के लिए होता है ।”

राजा जैसे ही मंत्री की बात सुनता है उसे गुस्सा आ जाता है और वह कहता है “मंत्री, तुम्हारा दिमाग ख़राब है क्या , यहाँ मेरी उंगली कट गई है, मै इतनी तकलीफ में हूँ और तुम कह रहे हो जो होता है अच्छे के लिए होता है ।”

राजा को मंत्री की बात पर बहुत गुस्सा आता है और वह मंत्री को कारागार में डाल देता है ।

अगले दिन राजा शिकार के लिए जंगल के अंदर जाता है और वहां उसे कुछ आदिवासी पकड़ लेते है ।

आदिवासी राजा को पकड़कर अपने कबीले में ले जाते है जहां उसे मारकर खाने का निर्णय लिया जाता है ।

आदिवासी राजा को पकड़कर जैसे ही आग मै डालने वाले रहते है तभी आदिवासियों का सरदार राजा के हाथ को देखता है और ज़ोर से चिल्लाकर सभी को शांत करता है और कहता है “रुको, हम इस आदमी को नहीं खा  सकते ।”

सभी आदिवासी शांत हो जाते है और उनमे से एक सरदार से पूछता है “क्या हुआ सरदार, हम इसे क्यों नहीं खा सकते ?”

सरदार जवाब देता है “हम आदिवासियों का एक नियम है कि हम किसी भी अधूरे शरीर वाले व्यक्ति को नहीं खा सकते है और इस व्यक्ति की एक उंगली नहीं है । “

फिर आदिवासी राजा को छोड़ देते है और राजा दो दिन बाद अपने महल में वापस आ जाता है ।

महल में आते ही राजा सबसे पहले  मंत्री को कारागार से बहार निकालता है और सारी बात बताते हुए कहता है “मंत्री जी, आप सही कह रहे थे, आज मेरी कटी हुई उंगली के कारण ही मै ज़िंदा बच पाया, आप कृपया मुझे माफ़ कर दीजिये जो मैंने आपको कारागार में डाला।”

मंत्री कहता है “नहीं राजा जी, आपको माफ़ी मांगने की कोई ज़रूरत नहीं है, कारागार में डालकर आपने भी मेरी जान बचाई है । “

मंत्री की बात सुनकर राजा सोच में पड़ जाता है और पूछता है “मंत्री जी, मैंने आपकी जान कैसे बचाई ।”

मंत्री कहता है “राजा जी, अगर आप मुझे कारागार में नहीं डालते तो हमेशा की तरह मै भी आपके साथ शिकार पर जाता, और वे आदिवासी मुझे मारकर खा जाते “

राजा मंत्री की बात सुनकर भावुक हो जाता है और मंत्री को गले लगा लेता है ।

इस Very short moral stories in Hindi – सकारात्मक सोच कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें हमेशा अपनी सोच सकारात्मक रखनी चाहिए क्योकि वाकई में जो होता है अच्छे के लिए होता है ।

Also read – Hindi short story for kid – अपना-अपना काम

Also read – Hindi short story for class 1 – दोस्ती और भरोसा

Also read – Hindi short stories for kids – लालची चूहे की कहानी

Also read – Hindi short stories – गट्टू और उसके गुस्से की कहानी

Also read – Hindi short stories for class 1 – कामचोर गधे की कहानी

अगर आपको यह Very short moral stories in Hindi – सकारात्मक सोच कहानी पसंद आई हो तो कृपया इसे अपने साथियो के साथ शेयर करे। धन्यवाद्।